Posted in Hindi poetry

एक फूल …..

एक फूल जब है खिलता 
कितना शीतल इतना कोमल
सबको अपनी मनमोहक सुगंध से
प्रसन्नचित्त वो करता
हँसता खेलता मनमर्जियाँ करता
पौधा गर्व से सिर उठाता
ये फूल है मेरा, अभिमान वो करता
पूरा बगीचा खिल उठाता
नाचता-गाता, संगीत की महफिल होती
फिर अचानक एक दिन
सब शांत, मातम-सा छा जाता
माली फूल ले गया
सब बस बेबसी में देखते रह गए
पहले तो उस फूल को खूब सजाया गया
महंगें दाम में बेचा गया
पर जब उसकी सुगंध ख़त्म हो गई
उसे फेक दिया
और वो कोमल पुष्प
कुचल कुचल कर मर गया ।
© ईरा सिंह

आपको मेरी ये कविता कैसी लगी मुझे कमेंट में जरूर बताना । और क्या आपको समझ में आया की यहां मैंने फूल किसको कहा है ? इसको पढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।

Thank you!!!

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Note: if you want to translate it, Google translator is available on my website page 😊

Author:

I am Doctor by profession who loves to write poetry and articles , a mental health enthusiastic , nature lover and very much interested in history and mythology .

114 thoughts on “एक फूल …..

  1. बहुत ही खूबसूरत रचना।👌👌

    कभी डाल पर खिल उस पौध संग
    बागीचे का रौनक बढ़ाता
    अपनी सुगन्ध से
    वातावरण को महकाता,
    फूल,
    और लड़कियाँ भी,
    दोनों जबतक जिंदा
    जहाँ भी रहते
    अपनी खुशबू से उस जगत को महकाते,
    अभिलाषा एक जैसी,
    एक वीरों के कदमों तले बिछ जाना चाहता,
    और दूजी
    अपनी प्रेम,त्याग,करुणा,ममता और
    वात्सल्य से,
    औरों का जीवन सँवारती।

    Liked by 2 people

    1. बिल्कुल सच कहा आपने ।
      ये कविता आपको अच्छी लगी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद । 😊😊

      Liked by 1 person

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